नई दिल्ली, जागरण संवाददाता : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में शुक्रवार देर रात तक चली एक्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में यौन उत्पीड़न के आरोपी एक प्रोफेसर को अनिवार्य सेवानिवृत्त करने के निर्णय पर मुहर लगा दी गई। प्रो. अजय तिवारी डीयू के हिंदी विभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक हैं, जिनकी अभी कई वर्षो की नौकरी बाकी थी। इनके अलावा भूगर्भ विभाग के एक प्राध्यापक को प्रशासनिक अनियमितताओं के चलते पांच वर्ष तक प्रशासनिक पदों से दूर रखने का फैसला भी लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार हिंदी विभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक के पद पर कार्यरत प्रो. अजय तिवारी पर विभाग की एक छात्रा ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। आरोप था कि उन्होंने छात्रा को अश्लील एसएमएस भी भेजे। जांच में आरोपों को सही पाया गया। गत वर्ष काउंसिल ने प्रोफेसर को बर्खास्त करने का निर्णय लिया था, लेकिन नए कुलपति की नियुक्ति और नई एक्जीक्यूटिव काउंसिल ने निर्णय बदलते हुए प्रो. तिवारी को अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया। इसमें उन्हें पेंशन का लाभ मिलता रहेगा।
वहीं भू-गर्भ विभाग के प्राध्यापक जेपी श्रीवास्तव पर भी प्रशासनिक अनियमितताओं के चलते उन्हें पांच साल के लिए किसी भी प्रशासनिक पद पर बने रहने की मनाही की गई है।
ईसी सदस्य डॉ. शिवा पांडे ने प्रो. तिवारी को बर्खास्त न करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह निर्णय गुरु-शिष्य परंपरा की मर्यादा को धूमिल करने वाले प्राध्यापक को राहत प्रदान करता है। ऐसा नहीं होना चाहिए
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